आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में हम सब व्यस्त हैं। सुबह जल्दी उठना, ऑफिस या बिज़नेस की भागदौड़, बच्चों की जिम्मेदारियां, और दिनभर का तनाव। इस सबके बीच सबसे ज्यादा प्रभावित होती है — हमारी खाने की आदत।
अक्सर हम:
- मोबाइल देखते हुए खाना खाते हैं.।
- टीवी के सामने डिनर करते हैं।
- काम के बीच जल्दी-जल्दी लंच खत्म करते हैं.।
परिणाम?
- पेट फूलना
- अपच
- वजन बढ़ना
- थकान
- बिना वजह भारीपन
ऐसी स्थिति में “माइंडफुल ईटिंग” एक साधारण लेकिन प्रभावी तरीका हो सकता है, जो हमें दोबारा भोजन से जुड़ना सिखाता है।
माइंडफुल ईटिंग क्या है?
माइंडफुल ईटिंग का अर्थ है — भोजन करते समय पूरी सजगता के साथ खाना।
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| शांत वातावरण में सजग होकर भोजन करने का अभ्यास |
इसका मतलब:
- हर कौर को ध्यान से चबाना
- स्वाद, सुगंध और बनावट को महसूस करना
- यह समझना कि शरीर को कितनी भूख है
- पेट भरने का संकेत पहचानना
यह कोई डाइट प्लान नहीं है।
यह कोई कैलोरी गिनने की प्रक्रिया नहीं है।
यह खाने का एक सजग तरीका है।
भारतीय परंपरा में भोजन को “अन्नपूर्णा का प्रसाद” माना गया है। आयुर्वेद में “अहारा विधि” का उल्लेख मिलता है, जिसमें भोजन के नियम बताए गए हैं — शांत मन से खाना, अच्छी तरह चबाना और कृतज्ञता रखना।
माइंडफुल ईटिंग उसी परंपरा का आधुनिक रूप है।
मेरी व्यक्तिगत यात्रा
कुछ वर्ष पहले तक मैं भी मोबाइल देखते-देखते खाना खाता था। न स्वाद का ध्यान, न मात्रा का। धीरे-धीरे पाचन खराब होने लगा।
एक आयुर्वेदिक चिकित्सक ने मुझसे कहा:
“भोजन केवल पेट भरने के लिए नहीं, शरीर और मन को पोषण देने के लिए है।”
मैंने छोटे बदलाव शुरू किए:
- मोबाइल हटाया
- धीरे चबाना शुरू किया
- जल्दी खाने की आदत छोड़ी
कुछ हफ्तों में ही फर्क महसूस हुआ। भारीपन कम हुआ, ऊर्जा बढ़ी और संतुष्टि का अनुभव होने लगा।
माइंडफुल ईटिंग क्यों जरूरी है?
तनाव के कारण हम अक्सर “इमोशनल ईटिंग” करने लगते हैं।
यानी जब असली भूख नहीं होती, तब भी कुछ न कुछ खाते रहते हैं।
कुछ अध्ययनों में यह पाया गया है कि सजग भोजन की आदत ओवरईटिंग कम करने में सहायक हो सकती है। इससे वजन प्रबंधन और मेटाबोलिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
हालांकि परिणाम व्यक्ति-व्यक्ति पर निर्भर करते हैं।
माइंडफुल ईटिंग के 7 आसान स्टेप्स
अब सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा — इसे शुरू कैसे करें?
1. खाने से पहले 2 मिनट रुकें
- मोबाइल दूर रखें।
- 5 गहरी सांस लें।
- भोजन के लिए कृतज्ञता महसूस करें।
यह मन को शांत करता है और शरीर को भोजन ग्रहण करने के लिए तैयार करता है।
2. अपनी थाली को ध्यान से देखें
रंगीन भोजन पोषक विविधता का संकेत हो सकता है:
- हरी सब्जी
- पीली दाल
- सलाद
- मौसमी फल
थाली को देखकर मुस्कुराएं। यह सरल अभ्यास भी सजगता बढ़ाता है।
3. छोटे कौर लें और 20–25 बार चबाएं
धीरे चबाने से:
- लार (Saliva) पाचन प्रक्रिया शुरू करती है
- पेट भरने का संकेत जल्दी मिलता है
- ओवरईटिंग कम हो सकती है
4. स्क्रीन-फ्री भोजन करें
- टीवी, मोबाइल, लैपटॉप से दूरी रखें।
- कम से कम दिन में एक बार “नो-स्क्रीन मील” जरूर लें।
80% पेट भरने पर रुकें
पूरी तरह पेट भरने के बजाय थोड़ा पहले रुक जाना बेहतर हो सकता है।
इससे पाचन पर कम दबाव पड़ता है।
6.भोजन के बाद हल्की सैर
डिनर के बाद 5–10 मिनट टहलना सहायक हो सकता है।
तुरंत चाय-कॉफी से बचें।
7. भोजन डायरी लिखें
रात में 2 लाइन लिखें:
- क्या खाया?
- कैसा महसूस हुआ?
- यह आदत आत्म-जागरूकता बढ़ाती है।
माइंडफुल ईटिंग के संभावित फायदे
- पाचन में सुधार
- गैस और भारीपन में कमी
- तनाव में Just
- बेहतर नींद
- वजन नियंत्रण में सहायता
- खाने से संतुष्टि
ध्यान दें: परिणाम व्यक्तिगत होते हैं।
आम गलतियां
जल्दी खाना
मोबाइल के साथ खाना
भावनात्मक भूख पहचान न पाना
सप्ताहांत में अत्यधिक भोजन
समाधान: धीरे-धीरे सुधार करें, पूर्णता की अपेक्षा न रखें।
बच्चों और परिवार के लिए विशेष सुझाव
“चबाओ और गिनो” गेम
सप्ताह में एक दिन फैमिली माइंडफुल डिनर
बच्चों को स्वाद पहचानने को कहें
गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग या गंभीर स्वास्थ्य समस्या वाले लोग किसी भी विशेष आहार परिवर्तन से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
आयुर्वेद में भोजन को औषधि समान माना गया है।
“अहारा विधि” के अनुसार:
- शांत वातावरण
- सही मात्रा
- अच्छी तरह चबाना
भोजन के बाद हल्की गतिविधि
यदि आप किसी हर्बल सप्लीमेंट (जैसे त्रिफला आदि) का उपयोग करना चाहते हैं, तो योग्य विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।
7-दिन का माइंडफुल ईटिंग चैलेंज
दिन 1–2: भोजन से पहले सांस पर ध्यान
दिन 3–4: बिना मोबाइल के भोजन
दिन 5–6: 20 बार चबाने का अभ्यास
दिन 7: भोजन डायरी शुरू करें
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
क्या माइंडफुल ईटिंग से वजन कम होता है?
यह ओवरईटिंग कम करने में मदद कर सकती है, जिससे वजन नियंत्रण में सहायता मिल सकती है।
क्या यह डाइटिंग है?
नहीं, यह खाने का तरीका है।
कितने दिन में असर दिखता है?
यह व्यक्ति की जीवनशैली और निरंतरता पर निर्भर करता है।
क्या यह डायबिटीज या हाई BP में मदद करता है?
यह स्वस्थ खाने की आदत विकसित करने में सहायक हो सकता है, लेकिन किसी भी बीमारी के लिए डॉक्टर की सलाह आवश्यक है।
निष्कर्ष
माइंडफुल ईटिंग कोई कठिन नियम नहीं है।
यह भोजन के प्रति सम्मान और सजगता का अभ्यास है।
आज से एक छोटा कदम उठाइए।
मोबाइल हटाइए।
धीरे चबाइए।
और भोजन का आनंद लीजिए।
अगर आप 7-दिन का माइंडफुल ईटिंग चैलेंज शुरू कर रहे हैं तो कमेंट में “चैलेंज” लिखें।
इस लेख को उस व्यक्ति के साथ जरूर शेयर करें जो जल्दी-जल्दी खाना खाता है।
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माइंडफुलनेस बच्चों के लिए - मेरी बेटी की कहानी
डिस्क्लेमर
यह लेख केवल शैक्षिक और जागरूकता उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। यदि आपको कोई स्वास्थ्य समस्या है तो किसी भी आहार परिवर्तन से पहले योग्य डॉक्टर से परामर्श लें।

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